Lactose Intolerance: लैक्टोज इन्टॉलरेंस क्या है?
परिचय
लैक्टोज इन्टॉलरेंस एक सामान्य पाचन समस्या है जिसमें शरीर दूध या दूध से बने उत्पादों को सही ढंग से पचा नहीं पाता। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब छोटी आंत पर्याप्त मात्रा में लैक्टेज एंजाइम का निर्माण नहीं करती, जो दूध में मौजूद लैक्टोज शुगर को पचाने के लिए आवश्यक होता है।
लक्षण
- पेट में फुलाव और गैस
- दस्त (डायरिया)
- उल्टी जैसा महसूस होना
- पेट में ऐंठन या दर्द
- गड़गड़ाहट की आवाज
कारण
लैक्टोज इन्टॉलरेंस का मुख्य कारण लैक्टेज एंजाइम की कमी है। यह स्थिति तीन प्रकार की हो सकती है:
- प्राथमिक लैक्टोज इन्टॉलरेंस: उम्र के साथ लैक्टेज की मात्रा में गिरावट आना।
- सेकेंडरी लैक्टोज इन्टॉलरेंस: आंतों की बीमारियों या संक्रमण के कारण।
- जन्मजात लैक्टोज इन्टॉलरेंस: यह दुर्लभ है और जन्म से ही लैक्टेज की कमी होती है।
निदान
- Hydrogen Breath Test: लैक्टोज पचाने में परेशानी के कारण साँस में हाईड्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है।
- Stool Acidity Test: मुख्यतः बच्चों के लिए उपयोगी।
- Lactose Tolerance Test: लैक्टोज लेने के बाद ब्लड शुगर में बढ़ोतरी मापी जाती है।
उपचार
- लैक्टोज मुक्त आहार लेना (Lactose-free diet)
- लैक्टेज एंजाइम सप्लीमेंट लेना
- दही और पनीर जैसे फर्मेन्टेड खाद्य पदार्थों का सीमित सेवन
- प्रोबायोटिक्स का सेवन
क्या खाएं और क्या न खाएं?
बचने योग्य चीजें:
- दूध, मलाई, पनीर
- आईसक्रीम, केक, बेकरी उत्पाद
- प्रोसेस्ड फूड जिसमें लैक्टोज हो
खाने योग्य विकल्प:
- सोया मिल्क, बादाम का दूध
- नारियल दूध, ओट्स मिल्क
- लैक्टोज-फ्री दूध
आयुर्वेदिक उपाय
- अदरक की चाय से पाचन ठीक होता है
- त्रिफला का सेवन
- हींग का उपयोग गैस कम करने के लिए
बच्चों में लैक्टोज इन्टॉलरेंस
बच्चों में यह स्थिति जन्मजात हो सकती है या किसी संक्रमण के कारण उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में विशेष फॉर्मूला दूध का उपयोग करें और डॉक्टर से सलाह लें।
दूध एलर्जी और लैक्टोज इन्टॉलरेंस में अंतर
दूध एलर्जी इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया होती है जबकि लैक्टोज इन्टॉलरेंस एक एंजाइम की कमी के कारण होती है। दोनों की पहचान और इलाज अलग-अलग है।
निष्कर्ष
लैक्टोज इन्टॉलरेंस एक सामान्य लेकिन असुविधाजनक स्थिति है। सही खान-पान, जीवनशैली और डॉक्टर की सलाह से इसे पूरी तरह से नियंत्रण में रखा जा सकता है। यदि दूध पीने के बाद बार-बार पेट की समस्या हो रही है, तो जांच अवश्य कराएं।
Sources: WHO, Mayo Clinic, NCBI, AIIMS






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